अब तक न्यूज, दिल्ली
पूर्व राज्यपाल एवं दबंग जाट के तौर पर जाने जाने वाले पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का सम्मान करने के लिए अनेक प्रतिनिधि शनिवार को आरके पुरम सेक्टर 12 स्थित सेंटर पार्क में इकट्ठा हुए थे वहां पर जैसे ही पूर्व राज्यपाल पहुंचे तोदिल्ली पुलिस ने उन्हें कार्यक्रम में भाग लेने से रोक दिया और वहां पर लगे टेंट को गिरा दिया। इससे गुस्साए खाप प्रतिनिधियों ने नारेबाजी शुरू कर दी। सोशल मीडिया पर चल रहा था कि खाप प्रतिनिधियों के साथ साथ पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। जैसे ही सोशल मीडिया पर पूर्व राज्यपाल को थाने ले जाने का समाचार मिला तो दर्जनों समर्थक थाने में पहुंच गए और कई खापों के प्रतिनिधि थाने के बाहर इकट्ठा हो गए। किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पुलिस थाने के बाहर अर्ध सैनिक बल कर दिया गया। वहीं दिल्ली साउथ बेस्ट डीएसपी मनोज सी. उनको गिरफ्तार करने वाली रियासत में लेने से किसी भी बात से साफ इनकार कर दिया।
देश के चार प्रदेशों में राज्यपाल रहे सत्यपाल मलिक सम्मान करने के लिए हरियाणा राजस्थान दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की खाप प्रतिनिधि आरके पुरम सेक्टर 12 सेंट्रल पार्क में पहले से तय कार्यक्रम के तहत इकट्ठा हुए थे। पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक द्वारा पुलवामा हमले को लेकर केंद्र सरकार की पोल खोलने से सरकार में खलबली मची हुई है। इसी को लेकर जैसे ही पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक कल पहुंचे तो दिल्ली पुलिस ने उन्हें रोक दिया और वहां पर लगा दिया। पुलिस का दावा था कि पार्क में मीटिंग करने के लिए उन्होंने कोई अनुमति नहीं ली गई थी इस पर पुलिस ने आपसे जताते हुए कुछ खास नेताओं को हिरासत में लिया था तो सत्यपाल मलिक भी थाने में कौनसे और धरना देने की घोषणा कर दी थी।
शनिवार की दोपहर को जैसे ही पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक को थाने में ले जाने की खबरें मिली तो हरियाणा राजस्थान उत्तर प्रदेश दिल्ली सहित आसपास के प्रदेशों की और उनके समर्थक थाने के बाहर जमा होने शुरू हो गए। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पुलिस थाने के बाहर सीआरपीएफ के जवानों की तैनात कर दिया गया। करीब 3 घंटे बाद पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक पुलिस थाने से बाहर आए तब जाकर उनके समर्थकों में हौसला हुआ।
आपको बता दें कि दिल्ली के आरके पुरम के सेक्टर 12 स्थित सेंटर पार्क में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था वहां पर आने वाले लोगों के लिए लगाया गया था और खाने पीने की व्यवस्था की गई थी। लेकिन पुलिस ने अनुमति ना होने का दावा करते हुए टेंट को उखाड़ दिया था। पुलिस की कार्रवाई के बाद वहां पर समान चारों तरफ बिखरा पड़ा था।
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आपको बता दें कि पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक जम्मू कश्मीर के राज्यपाल रहे हैं और उन्होंने एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा था कि फरवरी 2019 में जो पुलवामा में हमला हुआ था। वह केंद्रीय गृह मंत्रालय की लापरवाही के कारण हुआ था और उस समय उन्हें बोलने से मना कर दिया था। पूर्व राज्यपाल ने कहा था कि सीआरपीएफ ने एयरक्राफ्ट की मांग की थी लेकिन गृह मंत्रालय ने विमान देने से मना कर दिया था। पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि जब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत की थी तो उन्होंने इस बारे में चुप रहने और कोई बयान देने के लिए मना कर दिया था अजीत डोभाल के सामने यह बात को यहीं समाप्त कर चुप रहने के लिए कहा था। पूर्व राज्यपाल मलिक ने कहा कि सब से बात होने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि सरकार का इरादा पाकिस्तान प्रदोष मरना है और भाजपा का चुनावी फायदा उठाना चाहती है।
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उधर गृह मंत्री अमित शाह ने पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक और उनके समर्थन में बयान दे रहे नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर ऐसा कुछ हुआ था तो जिस समय वह जम्मू कश्मीर के राज्यपाल थे उस समय यह बात क्यों नहीं कहीं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि हम से अलग होने के बाद ही सब बातें क्यों याद आ जाती हैं। अमित शाह ने कहा कि यह सब समीक्षा के मुद्दे नहीं हैं हर आदमी को अपनी क्रेडिबिलिटी के बारे में सोचना चाहिए। गृह मंत्री ने कहा कि राजनीतिक स्वार्थ के कारण कुछ लोग हम से अलग होकर अनाप-शनाप ज्ञान देते हैं लेकिन उसका मूल्यांकन और मीडिया को करना चाहिए

